Sunday, April 5, 2009

प्रधानमंत्री पद कि घोषणा अनिवार्य हो

चुनाव का मौसम आ गया, नेताओं का बाज़ार सज चुका है, अपने अपने ग्राहकों को लुभाने का काम भी शुरू हो चुका है, सभी नेताओ ने अपने अपने सिद्धांतों की बलि चढाकर दुसरे दलों से समझौता कर लिया है, जो कि उनकी पुरानी फिदरत है । सिद्धांतों कि बलि चढाने में नंबर एक तो हमारे रामबिलाश पासवान जी है । मेरे अनुसार ये सत्ता से हमेशा चिपके रहने वाले नेता हैं, यु पी ऐ सरकार में ये मंत्री हैं और एन डी ऐ सरकार में भी ये महाशय जी मंत्री ही थे, तो फ़िर इनका सिद्धांत क्या है ये तो पता ही नही चलता है । बिहार कि सरकार बनाने के वक्त इनको लालू और भाजपा दोनों से एलर्जी थी, और आज लालू से गठजोड़ करने में इनको जरा भी संकोच नही है । पाँच साल तक सत्ता का सुख भोगने के बाद लालू जी को भी सोनिया मैडम कि शायद अब जरुरत नही है, इसीलिए बिहार में उन्होंने कांग्रेस को नजरअंदाज कर पासवान जी से हाथ मिला लिया, लेकिन आगे भी सत्ता का सुख भोगने का दरवाजा बंद न हो जाए इसलिए अपने आप को यु पी ऐ का ही घटक बताने से भी नही चुक रहे हैं । क्या पता अगली सरकार का गठन भी कांग्रेस के बिना नही हो पाए ?
टेलीविजन पे कई सारे विज्ञापन आ रहे है कि आपका वोट महत्वपूर्ण है और आप वोट जरूर करे । लेकिन सवाल यह है कि हम वोट किसको करें ? ये अपने ही सिद्धांतों को इतनी आसानी से तोड़ देते है तो जनता से किए वादे को तोड़ने में तो इनको जरा भी संकोच नही होगा । अगर मै वोट करता हूँ कांग्रेस को तो वो सरकार किसी के साथ भी मिलकर बना सकती है, हो सकता है कि वो एक ऐसे पार्टी के साथ सरकार बना ले जिसके सिद्धांतों को देश के एक बड़े वर्ग को नापसंद हो ?
देश कि सभी पार्टियों को चुनाव से पहले ही अपने या अपने सहयोगी पार्टियो में से किसी एक को प्रधान मंत्री पद के दावेदार के रूप में घोषित करना चाहिए ताकि देश कि जनता को वोट करने में परेशानी न हो । वोटरों के पास ४-५ प्रधान मंत्री पद के विकल्प होने चाहिए ताकि हम सीधे प्रधान मंत्री को ही वोट कर सके और अच्छे चरित्र वाले व्यक्ति को उस पद पर विठा सके । चुनाव आयोग को भी सभी दलों को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार कि घोषणा को अनिवार्य कर देना चाहिए और चुनाव बाद भी इसका अमल करने को बाध्य कर देना चाहिए ताकि आम जनता के पास बहुत ज्यादा विकल्प न हो ।
जय भारत, जय जनता