दि़ल्ली में जब कोई “बस” अचानक रुकती है तो पीछे से आवाज आती है ”ओए बिहारी गाड़ी बढा”।किसी रिक्शेवाले को “बिहारी” बोलकर कोई भी आसानी से अपनी भड़ास निकाल लेता है। मै अक्सर दिल्ली जाता हूँ और इन “उपाधियों” को बड़ी आसानी से कहीं पर भी सुन सकता हूँ। ये कहीं न कहीं उनकी उन कमियों को दशॆाता है जो मुझ जैसा बनने की कोशिश करता है और नाकाम होने के बाद किसी रिक्शेवाले को “बिहारी” बोलकर अपने दिल को तसल्ली देता है।
बिहार से ही shitikanth(IIT topper 2008) प्रौधोगिकी का झँडा बुलंद कर किसी न किसी राज्यों के ऊँचे पदों पर आसीन होते हैं। Mr Anand (Ramanujam classes for IIT, Founder of Super30’s) जिनका हर वषॆ IIT का Result शत् प्रतिशत होता है। पँजाब अगर आनाज ऊत्पादन में अव्वल है तो उसका कारण है “बिहारी श्रम”। दिल्ली का कोई भी दफ्तर बिहारियों बिना अधूरा है। हर दफ्तर के किसी न किसी टेबल पर बिहारी, माउस चलाता नजर आ ही जाएगा।
पू्रवोतर राज्यों में बिहारियों को भगाने की साजिश होती है। महाराष्ट्र में आए दिन बिहारियोँ पर हमले होते रहते हैं। इस वक्त मेरे TV Screen पर Breaking News आ रही है, “मुम्बई में रेलवे की परीक्षा देने आए बिहारियों पर मनसे कायॆकतॆाओं दा्रा हमला”। कहीं न कहीं ये उनकी हताशा और ईष्या को दशॆाता है, हम जैसा न बनने की ? मगर बिहार में सभी राज्य के लोगों को प्यार और सम्मान मिलता है। शायद हमें क्षमा करने की आदत हो गई है।
बिहारी सहनशील, यथातॆवादी, कतॆव्यनिष्ठ, सच्चे, ईमानदार और कोमल हृदयी होते हैं। हम छोटे से छोटे कामों को करने मे सहज महसूस करते हैं। शायद यही वजह है कि कम संसाधनों के वावजूद उन्नत परिणाम देने की क्षमता सिफॆ बिहारियों में ही है। अगर हमारे बिहार में पयॆाप्त संसाधन उपलब्ध हों, तो हमारे अन्दर इतनी काबिलियत है कि हम बिहार का नाम पूरे विश्व में शीषॆ पर रख देंगे।
उस वक्त भी हम आपको क्षमा करते रहेंगे।
Friday, October 31, 2008
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