Sunday, January 18, 2009

पटना का मोना थिएटर

मै बचपन से ही फिल्मो का शौकीन रहा हूँ । मै अपनी रविवार की छुट्टी फ़िल्म देखकर ही बिताता हूँ । करीब पाँच साल पहले मै दिल्ली के मल्टीप्लेक्स के 'वेव सिनेमा' में फ़िल्म देखी थी । इससे पहले मै मॉल और मल्टीप्लेक्स संस्कृति से अनजान था । जब मै पहली बार इस संस्कृति से रूबरू हुआ तो मुझे काफ़ी आश्चर्य हुआ कि ऐसे भी सिनेमाघर होते हैं । उस वक्त मेरे दिल में फ़िल्म देखने की खुशी के साथ साथ हमारे अपने शहर 'पटना' में ऐसी सुविधाओं का अभाव होने का भी दुःख होता था । मै सोंचता था कि काश पटना में भी ऐसे मल्टीप्लेक्स हो, पर दूर दूर तक कोई उम्मीद की किरण दिखाई नही देती थी ।

पटना बिहार की राजधानी है । मनोरंजन के लिए यहाँ कुछ ऊँगली पर गिने सिनेमाघरों के अलावा कुछ खास नही है । करीब दो साल पहले जब पटना में 'विशाल मेगा मार्ट' की इकाई का शुभारम्भ हुआ था उस वक्त एक विशाल जनसैलाब इस मार्ट की ओर कुच कर दिया । कारण स्पष्ट था लोगों में आधुनिक तकनीक से शौपिंग करने की भूख । यह जनसैलाब इस बात को भी प्रमाणित करता है कि पटनाइट्स में आधुनिक सुविधाओं का खर्च वहन करने का भी सामर्थ है ।

पटना का मोना सिनेमा हॉल करीब दो साल पहले बंद कर दिया गया था, चर्चा थी की इसको नए रूप में बनाया जाएगा । कुछ दिन पहले न्यूज़ पेपर में ख़बर छपी की मोना सिनेमा का उदघाटन फलां दिन होने जा रहा है और ये भी बताया गया कि ये मल्टीप्लेक्स जैसी सारी सुविधाओं से लैस है, तो मेरे अन्दर खुसी का ठिकाना न रहा, और मै अगले संडे को इस थिएटर में मूवी देखने का फ़ैसला किया ।

रविवार को जब मै मोना सिनेमा पहुंचा तो बाहर से ये पुराने मोना जैसा ही दिखा, फर्क सिर्फ़ रंग रोगन का ही था । टिकट का दर १५०/- रुपये रखा गया था, जो दिल्ली के विभिन्न मल्टीप्लेक्सों के समतुल्य ही था । कंप्यूटर वाला टिकट के साथ बिल्डिंग के कैम्पस में प्रवेश करते ही सुरक्षा और सिगरेट-गुटका की जाँच की गई । बगल में ही लिफ्ट नजर आई, जिसका निर्माण कार्य अभी चल ही रहा था इसलिए सीढियों से ऊपर गया । जब मै सिनेमा हॉल के अन्दर पहुंचा तो जैसे मेरा पाँच साल पुराना सपना साकार नजर आया । टिकट पर अंकित सीट नंबर को पढ़कर कोई भी अपनी सीट तक आसानी से पहुँच सकता था । मै भी बिना किसी से पूछे ही अपनी सीट तक पहुँच गया । मखमली कालीन और सोफेदार सीट को देखकर मुझे ' इ डी एम का पीवीआर सिनेमा ' याद आ गया जहाँ मै अक्सर फ़िल्म देखा करता था । आधुनिक प्रोजेक्शन और डोल्बी डिजीटल साउंड इस थिएटर को मल्टीप्लेक्स सरीखे सिनेमा हॉल की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया । कुल मिलाकर ये सिनेमाहाल मल्टीप्लेक्स वाली सारी सुविधाओं से लैस एक सिन्गल्प्लेक्स है ।

पटना को महानगर वाली सुविधाए मुहैया कराने के लिए मै इस थिएटर के मालिक काटारुका जी को दिल से बधाई देता हूँ ।